शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के सर्वोत्तम तरीके क्या हैं?

शुक्राणुओं की संख्या या कुल शुक्राणुओं की संख्या वीर्य के एक नमूने में मौजूद शुक्राणुओं की औसत कुल संख्या को दर्शाती है. शुक्राणु गणना उन कई गणनाओं में से एक है जिसे नियमित वीर्य विश्लेषण के दौरान मूल्यांकित किया जाता है और इसे प्रजनन क्षमता का एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है.

वर्तमान समय के विश्व स्वास्थ्य संगठन दिशानिर्देशों के आधार पर , एक स्वस्थ शुक्राणु गणना १५ मिलियन प्रति मिलीलीटर (मिली) या प्रति नमूने में कम से कम ३९ मिलियन की है. १० मिलियन प्रति मिलीलीटर से कम शुक्राणुओं की संख्या को असामान्य माना जाता है और आमतौर पर इसे पुरुष बांझपन से जोड़ा जाता है.

कुछ भी जो हार्मोन्स को प्रभावित करता है जो शुक्राणुओं के उत्पादन को नियंत्रित करता है या एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है, वह शुक्राणुओं के स्वस्थ विकास में सहायक हो सकता है और शुक्राणुओं की संख्या में सुधार करने में मददगार साबित हो सकता है. कुल मिलाकर, टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित करने वाले कारकों को शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर असर डालने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक के रूप में देखा जाता है.

शुक्राणुओं को बढ़ाने के तरीके के लिए तथ्य:

  • व्यायाम और नींद से शुक्राणुओं की संख्या में सुधार दिखाई पड़े हैं.
  • उपचार में सबसे पहले इसी बात की अनुशंसा की जाती है कि आप गैर-फार्माकोलॉजिक उपचारों का प्रयोग करें.
  • धूम्रपान को लंबे समय से आपके समग्र स्वास्थ्य, शुक्राणु उत्पादन, और गुणवत्ता को कम करने के लिए जिम्मेदार माना गया है.
  • बहुत कम शुक्राणुओं वाले पुरुषों को दवा दी जा सकती है.

प्राकृतिक रूप से शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के तरीके

अधिकांश पश्चिमी देशों में शुक्राणुओं की संख्या घट रही है लेकिन गैर-फार्माकोलॉजिक उपचार इसमें मददगार साबित हो सकते हैं.

कई दशकों से शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि अधिकांश पश्चिमी देशों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता और प्रजनन दर में कमी आई है. २०१७ के अध्ययन के मुताबिक, १९७३ और २०११ के बीच उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लोगों के औसत शुक्राणुओं की संख्या में ५९.३ % की कमी आयी है.

समस्या की पहचान करने के अध्ययनों के बावजूद, इस गिरावट के कारणों और इसे फिर से सही करने के तरीके अभी तक अज्ञात ही हैं.

प्राचीन समय से ही शुक्राणुओं की संख्या और समग्र शुक्राणु स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए, हर्बल और पारंपरिक दवाओं, कई गैर-फार्माकोलॉजिकल उपचारों का उपयोग होता रहा है.

शोधकर्ताओं ने दिखलाया है कि इनमें से अधिकतर उपचार शुक्राणुओं को किसी न किसी तरह से प्रभावित करते हैं.

शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के प्राकृतिक तरीकों में शामिल हैं:

१. व्यायाम करें और सो जाएँ

कई अध्ययनों से पता चला है कि मोटापे और अधिक वजन से प्रभावित व्यक्तियों में वजन घटाने और व्यायाम से शुक्राणुओं की संख्या में सुधार या वृद्धि हो सकती है. हालांकि, स्वस्थ शुक्राणुओं से बॉडी मास इंडेक्स ( बीएमआई ) को जोड़ने वाले वैज्ञानिक तर्क अभी भी कमजोर हैं.

२०१७ के एक अध्ययन में पाया गया कि १६-सप्ताह के एरोबिक व्यायाम कार्यक्रम, कम से कम ५० मिनट के मध्यम अभ्यास, सप्ताह में तीन बार ५० से ६५ प्रतिशत उच्च दिल की धड़कन से ४५ आलसी, मोटापे से ग्रस्त पुरुषों में शुक्राणुओं की मात्रा और एकाग्रता में वृद्धि हुई है.

२. तनाव कम करें

एक स्वस्थ आहार और व्यायाम से तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है.

तनाव का कोई भी प्रकार शरीर को रक्षात्मक कार्यों और ऊर्जा की संरक्षित करने के लिए सक्रिय कर सकता है. संकट के समय में, प्राकृतिक रूप से शरीर प्रजनन पर कम ध्यान देकर सर्वाइव करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है.

तनाव को कम करने के लिए तनाव के कारण को सही करने की आवश्यकता होती है, हालांकि व्यायाम और स्वस्थ आहार जैसे कारकों से तनाव का प्रभाव कम होता है.

जो लोग गंभीर तनाव का सामना कर रहे हैं, उनके लिए डॉक्टर एंटी एंग्जायटी या एंटी-डिप्रेशन दवाएं लिख सकते हैं.

३. धूम्रपान बंद करें

२०१६ के एक अध्ययन ने लगभग ६,००० प्रतिभागियों पर २० विभिन्न अध्ययनों के परिणामों की समीक्षाओं में पया कि लगातार धूम्रपान से शुक्राणुओं की संख्या में कमी आती है.

४. अत्यधिक शराब और दवाओं के उपयोग से बचें

शुक्राणु स्वास्थ्य और दवाओं के बीच के लिंक की खोज करने वाले अध्ययनों की संख्या नैतिक परिणामों के चलते सीमित कर दी गई है. हालांकि, कुछ शोधकर्ताओं ने अल्कोहल, गांजा और कोकेन जैसे ड्रग्स के उपयोग को शुक्राणुओं के उत्पादन में आयी कमी से जोड़ा है.

लम्बे समय तक बरकरार रहने वाला असर: ३ से ६ महीने तक

अपने दैनिक खान-पान और दिनचर्या के साथ १ कैप्सूल सुबह और पुनः १ कैप्सूल शाम में लें.
५ से १५ दिनों तक इस प्रक्रिया को जारी रखें. इसके प्रयोग के पांचवे दिन ही इसका असर दिखने लगेगा. इसके बाद
कुछ दिनों के अंतराल के बाद फ़िर से इस प्रक्रिया को दोहराएँ.
उसके बाद इसका असर ३ से ६ महीने तक बरकरार रहता है.
जरूरत पड़ने पर इसके प्रयोग को दोहराया जा सकता है.

निम्न स्थितियों में इसका प्रयोग किया जा सकता है

  • कड़ेपन की समस्या
  • शीघ्रपतन
  • अक्सर सम्भोग में लिप्त होने में दिक्कत
  • बहुत ज्यादा खेलों की गतिविधि होने पर
  • शारीरिक और मानसिक थकान, तनाव
  • वीर्य का निम्न गुणवत्ता वाला होना और मात्रा में कम होना
  • ऑर्गाज़्म की उत्तेजना में कमी का होना

५. पर्चों में लिखी जाने वाली कुछ दवाओं से बचें

कुछ नुस्खे संभावित रूप से शुक्राणुओं के स्वस्थ उत्पादन को कम कर सकते हैं. एक बार जब कोई व्यक्ति दवा लेन बंद कर देता है, तो उसके शुक्राणुओं की गणना सामान्य हो जाती है या बढ़ जाती है.

दवाएं जो अस्थायी रूप से शुक्राणुओं के उत्पादन और विकास को कम करती हैं, उनमें शामिल हैं:

  • कुछ एंटीबायोटिक्स
  • एंटी एण्ड्रोजन्स
  • एंटी- इन्फ्लेमेटरी
  • एंटीसाइकोटिक्स
  • कार्टिकोस्टेरॉयड
  • एनाबोलिक स्टेरॉयड (रिकवरी समय १ साल तक)
  • एक्सोजेनस (बाहरी) टेस्टोस्टेरोन
  • मेथाडोन

६. मेथी सप्लीमेंट

मेथी को शुक्राणुओं के स्वास्थ्य के लिए लंबे समय से प्राकृतिक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया गया है, और समर्थकों का सुझाव है कि यह शुक्राणुओं की संख्या में सुधार ला सकती है. २०१७ के एक अध्ययन में पाया गया कि पेटेंट लंबित यौगिक फ्युरोसैप®, जो मेथी के बीजों से विकसित किया गया है, वह समग्र रूप से वीर्य की गुणवत्ता और शुक्राणुओं की संख्या में सुधार लाता है.

७. पर्याप्त विटामिन डी और कैल्शियम गृहण करें

शोधकर्ता इस तथ्य के पीछे के कारणों को तो पूरी तरह से नहीं जानते हैं कि आखिर क्यों विटामिन डी और कैल्शियम सीरम शुक्राणुओं के स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. कुछ अध्ययनों से पता चला है कि वे आहार जिनमे विटामिन डी की मात्रा कम होती है उनका सेवन करने से शुक्राणुओं की संख्या में भी कमी आती है.

स्वास्थ्य खाद्य भंडार और ऑनलाइन स्टोर्स में विटामिन डी और कैल्शियम की खुराक खरीद के लिए उपलब्ध हैं.

८. अश्वगंधा

अश्वगंधा जिसे भारतीय जिनसेंग के रूप में जाना जाता है, उसे लंबे समय से कई यौन रोगों में रामबाण दवा की तरह से पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल किया गया है. २०१६ के एक अध्ययन में पाया गया कि ४६ कम शुक्राणुओं वाले पुरुष जिन्होंने प्रति दिन ६७५ मिलीग्राम अश्वगंधा का रोजाना सेवन किया उनके शुक्राणुओं में १६७ प्रतिशत की वृद्धि पायी गयी.

अश्वगंधा को ऑनलाइन या स्वास्थ्य खाद्य भंडार में खरीदा जा सकता है.

९. एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें

एंटीऑक्सिडेंट वे अणु हैं जो मुक्त कणों और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य यौगिकों को हटाने और निष्क्रिय करने में मदद करते हैं. कई विटामिन्स और खनिज एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं, और कई अध्ययनों ने शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि में एंटीऑक्सीडेंट के उपयोग को शामिल किया है.

स्वस्थ शुक्राणुओं में योगदान देने एंटीऑक्सीडेंट में शामिल हैं:

  • सेलेनियम
  • विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड)
  • विटामिन ई
  • ग्लूटाथियोन
  • कोएंजाइम क्यू१०
  • आई- कार्नीटाइन

१०. स्वस्थ वसा का सेवन बढ़ाएं

पॉलीअनसैचुरेटेड वसा या स्वस्थ वसा, जैसे कि ओमेगा – और ओमेगा-६, शुक्राणु झिल्ली के स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण साबित होते हैं.

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि आदर्श शुक्राणु विकास और एंटीऑक्सीडेंट लाभों के लिए किसी भी व्यक्ति को इन दोनों आवश्यक ओमेगा यौगिकों का समान मात्रा में सेवन करना चाहिए.

ओमेगा-३ सप्लीमेंट को ऑनलाइन विभिन्न ब्रांडों के स्टोर्स से खरीदा जा सकता है.

११. अस्वास्थ्यकर वसा का सेवन कम करें

२०१४ के एक अध्ययन में १८ से २३ वर्ष की उम्र के बीच के २०९ स्वस्थ स्पैनिश पुरुषों के सर्वेक्षण में पाया गया, कि जैसी ही उन्होंने ट्रांस फैटी एसिड के उपभोग में वृद्धि की, वैसे ही उनके शुक्राणुओं की संख्या आनुपातिक रूप से घट गई.

कई अध्ययनों से यह भी पता चला है कि ट्रांस फैटी एसिड शुक्राणु विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में शामिल लंबी श्रृंखला वाले पॉलीअनसैचुरेटेड वसा की शुक्राणु झिल्ली में योगदान करने वाली क्षमता को खराब कर सकता है.

१२. पर्यावरण सम्बन्धी या व्यावसायिक विषाक्त पदार्थों और प्रदूषकों के संपर्क में आना कम करें या बचें

जैसे कि पर्यावरण और वातावरण तेजी से प्रदूषित हो रहा है, पर्यावरण कारक, जैसे वायु की गुणवत्ता और जहरीले रासायनिक पदार्थ, अक्सर शुक्राणु स्वास्थ्य और इसकी कुल गिनती को प्रभावित करते हैं. जहां भी संभव हो पर्यावरण के विषाक्त पदार्थों से बचें यह आपके समग्र स्वास्थ्य में भी योगदान देगा.

यह इंगित करना महत्वपूर्ण है कि केवल कुछ अध्ययनों ने ही कम शुक्राणुओं और पर्यावरणीय दूषित पदार्थों के बीच सम्बन्ध दिखाया है, जबकि अधिकतर शोध इसका समर्थन नहीं करते हैं.

१३. बहुत अधिक सोया या गैर-मानव एस्ट्रोजन वाले खाद्य पदार्थों से बचें

कुछ खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से सोया उत्पादों में फाइटोस्ट्रोजेन (पादप एस्ट्रोजेन ) होते हैं जो कि टेस्टोस्टेरोन बॉन्डिंग और शुक्राणु उत्पादन को कम करने वाले यौगिकों में से एक हैं . कई डिब्बाबंद और प्लास्टिक पैक्ड उत्पाद भी एस्ट्रोजेन की कृत्रिम मात्रा से भरपूर होते हैं.

१४. पर्याप्त फोलेट और जिंक गृहण करें

सीमित अध्ययनों में दिखाया गया है कि फोलेट और जिंक को मिलाकर उपयोग में लाने से शुक्राणुओं की सान्द्रता और कुल गणना सहित शुक्राणुओं के समग्र स्वास्थ्य में वृद्धि होती है.

शुक्राणुओं की संख्या में सुधार करने के लिए खाद्य पदार्थ

यद्यपि सप्लीमेंट्स को अधिकांश विटामिन, खनिजों और एंटीऑक्सिडेंट्स की दैनिक मात्रा को पाने के लिए एक सुरक्षित तरीका माना जाता है, लेकिन शरीर हमेशा उन्हें आसानी से अवशोषित नहीं करता है.

अधिकांश अध्ययनों से पता चलता है कि विशिष्ट यौगिकों और रसायनों में समृद्ध खाद्य पदार्थों को खाने से शरीर अधिक कुशलतापूर्वक उन तत्वों को गृहण कर पाता है. तो स्वाभाविक रूप से शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि शुक्राणुओं के अनुकूल पोषक तत्वों में उच्च खाद्य पदार्थों की खपत में वृद्धि की जाए.

शुक्राणुओं को बढ़ाने वाले भोजन में शामिल पोषक तत्व हैं:

शुक्राणुओं को बढ़ाने वाले पोषक तत्वों में समृद्ध खाद्य पदार्थों में केला, डार्क चॉकलेट, जिनसेंग और अखरोट आदि शामिल हैं.

  • अखरोट
  • साइट्रस फल
  • साबुत गेहूं और अनाज
  • ज्यादातर मछली, विशेष रूप से वाइल्ड सैल्मन, कॉड, और हडॉक
  • ज्यादातर शेलफिश, विशेष रूप से ऑयस्टर
  • विटामिन डी समृद्ध दूध और दूध से जुड़े हुए उत्पाद
  • चॉकलेट
  • लहसुन
  • केला
  • ब्रोकोली
  • जिनसेंग
  • हल्दी
  • शतावर,
  • पत्तेदार सब्जियां, विशेष रूप से पालक और गोभी
  • किण्वित नट्स और बीज

शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने वाली दवाएं

डॉक्टर बहुत कम शुक्राणुओं वाले या अतिरिक्त स्वास्थ्य समस्याओं से घिरे पुरुषों के लिए दवा लिख सकते हैं.

कम शुक्राणुओं के इलाज के उपयोग में लायी जाने वाली दवाओं में शामिल हैं:

  • क्लोमिफीन साइट्रेट ओरल (सेरोफेन)
  • सेरोफेन ओरल
  • गोंनल-एफ® आरएफएफ * रेडी-जेक्ट® (फॉलीट्रोपिन अल्फा या गोंनल-एफ) या अधस्त्वचीय (त्वचा के नीचे) इंजेक्शन
  • यदि मूत्र या प्रजनन पथ संक्रमण के कारण समस्या हुई हो तो एंटीबायोटिक दवाएं
  • मानव कोरियोनिक गोनाडोट्रोफिन (एचसीजी) (ब्रांड नाम कोरगन और प्रेगनल)
  • लेट्रोज़ोल या एनास्ट्रोज़ोल
  • एक्सोजेनस एंड्रोजन

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