पुरुष जननक्षमता और धातु की मात्रा बढ़ाने के 10 तरीके

अनुर्वरता एक ऐसी समस्या है जो दुनिया के पुरुषों में तेजी से फैल रही है।

हर छः में से एक जोड़े को इसकी समस्या होती है और शोधकर्ताओं का अनुमान है कि हर तीन में से एक मामला सिर्फ पुरुषों में समस्या के कारण होता है।

नामर्दी का इलाज हमेशा संभव तो नहीं होता है लेकिन कई बार अच्छे खान-पान, सप्लिमेंट्स और जीवनशैली में बदलाव करके इसे थोड़ा ठीक किया जा सकता है।

इस लेख में ऐसे ही कुछ जीवनशैली के बदलावों, भोजन, पोषक पदार्थ और सप्लिमेंट्स के बारे में बताया गया है जो पुरुषों में उर्वरता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं।

पुरुष अनुर्वरता क्या है?

उर्वरता से तात्पर्य है, लोगों की प्राकृतिक तरीके से प्रजनन की क्षमता।

जब कोई आदमी अपनी महिला पार्टनर को गर्भवती करने में असमर्थ होता है तो इसे पुरुष अनुर्वरता कहते हैं। यह आम तौर पर उसके शुक्राणु कोशिकाओं की गुणवत्ता पर निर्भर होती है।

  •  कामेच्छा: इसे काम-वासना भी कहते हैं। कामेच्छा का अर्थ होता है किसी व्यक्ति की सेक्स करने की इच्छा। खाने की चीजें और सप्लिमेंट कामेच्छा बढ़ाने का दावा करते हैं उन्हें कामोद्दीपक कहा जाता है।
  •  इरेक्टाइल डिसफंक्शन: इसे हिन्दी में ठीक से खड़ा न होना या नामर्दी के नाम से भी जाना जाता है। जब कोई आदमी खड़ा करने या खड़ा रखने में असमर्थ होता है तो इस बीमारी को इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहते हैं।
  •  शुक्राणु संख्या: वीर्य की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण पहलू होता है वीर्य में उपस्थित शुक्राणु कोशिकाओं की संख्या या सांद्रता।
  •  शुक्राणु गतिशीलता: स्वस्थ शुक्राणु कोशिकाओं का एक आधारभूत लक्षण होता है उनके तैरने की क्षमता। शुक्राणु गतिशीलता को वीर्य के सैंपल में गतिशील शुक्राणुओं के प्रतिशत से मापा जाता है।
  •  टेस्टोस्टेरोन स्तर: टेस्टोस्टेरोन पुरुषों का सेक्स हॉरमोन है। इसका स्तर कम होना भी कुछ पुरुषों में नामर्दी का कारण हो सकता है।

नामर्दी के कई कारण हो सकते हैं और यह आनुवांशिक कारणों, सामान्य स्वास्थ्य, फिटनेस, बीमारियों और खाने की चीजों में गड़बड़ी के कारण हो सकती है।

इसके अलावा, एक स्वस्थ जीवनशैली और खान-पान भी महत्वपूर्ण होते हैं। खाने की कुछ चीजें और पोषक पदार्थ अन्य खानों की तुलना में उर्वरता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं।

ये रहे 10 ऐसे वैज्ञानिक तरीके जिनकी मदद से पुरुषों में धातु की मात्रा और उर्वरता बढ़ाई जा सकती है।

1. डी-एस्पार्टिक एसिड सप्लिमेंट्स लें

डी-एस्पार्टिक (डी-एए) एक प्रकार का एस्पार्टिक एसिड है जो एक अमीनो एसिड है जिसे डाइटरी सप्लिमेंट के रूप में बेचा जाता है।

इसे एल-एस्पार्टिक एसिड से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए जो कई तरह के प्रोटीनों की संरचना बनाता है और डी-एए से कहीं ज़्यादा आम है।

डी-एए मुख्यतः कुछ ग्रंथियों में पाया जाता है, जैसे अंडोकोष, वीर्य और शुक्राणु कोशिकाओं में।

शोधकर्ताओं का मानना है कि पुरुषों की मर्दानगी में डी-एए का रोल होता है। वास्तव में यह पाया गया है कि अनुर्वर पुरुषों में उर्वर पुरुषों की तुलना में डी-एए का स्तर काफी कम होता है।

इस तथ्य को कई शोधों ने प्रमाणित किया है कि डी-एए सप्लिमेंट्स से टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ सकता है। टेस्टोस्टेरोन एक सेक्स हॉरमोन है जो पुरुषों की उर्वरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।

उदाहरण के लिए, अनुर्वर पुरुषों के एक अवलोकनार्थ शोध में पाया गया कि तीन महीने तक रोज 2.66 ग्राम डी-एए लेने से टेस्टोस्टेरोन स्तर में 30-60% की बढ़त पाई गई और धातु की मात्रा और गतिशीलता 60-100% बढ़ गई।

ऐसे लोगों के पार्टनरों में गर्भ धारण करने की संख्या भी बढ़ गई थी।

इसके अलावा, स्वस्थ पुरुषों में किए गए एक नियंत्रित शोध ने दर्शाया कि दो हफ्ते तक रोज 3 ग्राम डी-एए सप्लिमेंट लेने से टेस्टोस्टेरोन स्तर 42% बढ़ गया

यदि आप डी-एस्पार्टिक एसिड सप्लिमेंट लेना चाहते हैं तो एक बढ़िया सिलेक्शन Amazon पर उपलब्ध है।

हाँ, इसके प्रमाण सतत नहीं है। खिलाड़ियों या ज़्यादा कसरत करने वाले सामान्य टेस्टोस्टेरोन स्तर वाले मर्दों में पाया गया कि डी-एए से इसका स्तर और नहीं बढ़ता बल्कि ज़्यादा डोज़ लेने पर कम हो जाता है।

सारे प्रमाणों को एक साथ देखने से यह संकेत मिलता है कि डी-एए सप्लिमेंट कम टेस्टोस्टेरोन की समस्या से जूझ रहे पुरुषों में तो उर्वरता बढ़ा सकते हैं लेकिन जिन पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन सामान्य या ज़्यादा है, उन्हें इससे अतिरिक्त लाभ नहीं होता।

इन्सानों में डी-एए सप्लिमेंट्स के पूरे लाभ और जोखिम जानने के लिए और शोधों की आवश्यकता है।

निष्कर्ष: डी-एस्पार्टिक एसिड (डी-एए) सप्लिमेंट अनुर्वर या कम टेस्टोस्टेरोन स्तर वाले पुरुषो में टेस्टोस्टेरोन स्तर और उर्वरता बढ़ा सकते हैं। लेकिन, वैज्ञानिक इस बिन्दु पर निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए हैं।

2. नियमित व्यायाम करें

व्यायाम से न सिर्फ आपका आत्मविश्वास और शारीरिक क्षमता बढ़ती है – इससे आपका टेस्टोस्टेरोन स्तर भी बढ़ सकता है।

शोध दर्शाते हैं कि जो पुरुष नियमित रूप से व्यायाम करते हैं उनका टेस्टोस्टेरोन स्तर और वीर्य की गुणवत्ता निष्क्रिय पुरुषों की तुलना में ज़्यादा होती है।

हाँ, एक्सर्साइज़ की अति करने से बचें क्योंकि इससे उल्टा प्रभाव हो सकता है और टेस्टोस्टेरोन स्तर घट भी सकता है। पर्याप्त मात्रा में ज़िंक लेने से यह जोखिम कम हो जाता है।

यदि आप एक्सर्साइज़ नहीं करते हैं और अपनी उर्वरता बढ़ाना चाहते हैं तो शारीरिक रूप से सक्रिय रहना आपके लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।

निष्कर्ष: नियमित रूप से एक्सर्साइज़ करने से आपका टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ सकता है और उर्वरता बेहतर हो सकती है।

3. पर्याप्त विटामिन सी लें

जब शरीर में रिएक्टिव ऑक्सिजन स्पीसीज़ (आरओएस) नुक्सानदेह स्तर तक पहुँच जाते हैं तो इस अवस्था को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कहते हैं।

यह अवस्था तब आती है जब बीमारियों, बुढ़ापे, अस्वस्थ जीवनशैली या प्रदूषण के कारण शरीर की एंटीऑक्सीडेंट प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है।

शरीर में आरओएस लगातार बनते रहते हैं लेकिन स्वस्थ लोगों में इनका स्तर नियंत्रित रहता है। आरओएस का स्तर ज़्यादा हो जाने से ऊतकों को नुक्सान पहुँचने लगता है और सूजन आने लगती है जिससे लंबी चलने वाली बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे भी प्रमाण हैं कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और आरओएस के अत्यधिक स्तर से पुरुषों में नामर्दी हो सकती है।

पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट लेने से कुछ हानिकारण प्रभावों से लड़ने में मदद मिल सकती है। ऐसे भी कुछ प्रमाण हैं कि विटामिन सी सप्लिमेंट्स से पुरुषों में वीर्य की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। अनुर्वर पुरुषों के एक शोध में पाया गया कि दो महीने तक दिन में दो बार 1,000 मिग्रा विटामिन सी सप्लिमेंट लेने से शुक्राणु गतिशीलता में 92%, और वीर्य की मात्रा में 100% की बढ़त पाई गई। इससे ठीक से निर्मित नहीं हुई शुक्राणु कोशिकाओं में भी 55% की कमी आई।

भारत के औद्योगिक मजदूरों पर किए गए एक अवलोकनात्मक शोध ने संकेत दिए कि हफ्ते में पाँच बार 1,000 मिग्रा विटामिन सी लेने से शुक्राणु कोशिकाओं में आरओएस के कारण होने वाले डीएनए नुक्सान को रोकने में मदद मिल सकती है।

विटामिन सी सप्लिमेंट वीर्य की मात्रा और गतिशीलता को काफी बढ़ा देते हैं और साथ ही ठीक से निर्मित न हुई शुक्राणु कोशिकाओं की संख्या कम कर सकते हैं।

इन सभी नतीजों को एक साथ देखने पर यह इंगित होता है कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से ग्रस्त अनुर्वर पुरुषों में विटामिन सी से उर्वरता बढ़ाई जा सकती है।

लेकिन किसी भी तरह के निश्चित दावे करने से पहले नियंत्रित शोध आवश्यक हैं।

4. रिलैक्स करें और तनाव घटाएँ

तनाव से आपकी सेक्स संतुष्टि कम और उर्वरता नष्ट हो सकती है.

शोधकर्ता मानते हैं कि तनाव के हानिकारक प्रभावों के पीछे कुछ हद तक कोर्टिसोल नमक हॉरमोन का हाथ होता है। लंबे समय तक तनाव बने रहने से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है जिसका टेस्टोस्टेरोन स्तर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

जब कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है तो टेस्टोस्टेरोन स्तर कम होने लगता है।.

गंभीर अकारण होने वाली एंज़ायाटी को आम तौर पर मेडिटेशन (ध्यान) से ट्रीट किया जाता है लेकिन हल्के तनाव से आराम पाने के लिए कई रिलैक्सेशन तकनीकें मौजूद हैं।

तनाव का प्रबंधन करना बहुत सरल हो सकता है और इसलिए आपको कई बार बस प्राकृतिक वातावरण में सैर, ध्यान लगाना, एक्सर्साइज़ करना या दोस्तों के साथ टाइम बिताने से ही आराम मिल जाता है।

निष्कर्ष: तनाव से सेक्स संतुष्टि कम होकर अनुर्वरता बढ़ सकती है। तनाव प्रबंधन और रिलैक्सेशन आपकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर होने चाहिए।

लम्बे समय तक बरकरार रहने वाला असर: ३ से ६ महीने तक

अपने दैनिक खान-पान और दिनचर्या के साथ १ कैप्सूल सुबह और पुनः १ कैप्सूल शाम में लें.
५ से १५ दिनों तक इस प्रक्रिया को जारी रखें. इसके प्रयोग के पांचवे दिन ही इसका असर दिखने लगेगा. इसके बाद
कुछ दिनों के अंतराल के बाद फ़िर से इस प्रक्रिया को दोहराएँ.
उसके बाद इसका असर ३ से ६ महीने तक बरकरार रहता है.
जरूरत पड़ने पर इसके प्रयोग को दोहराया जा सकता है.

निम्न स्थितियों में इसका प्रयोग किया जा सकता है
  • कड़ेपन की समस्या
  • शीघ्रपतन
  • अक्सर सम्भोग में लिप्त होने में दिक्कत
  • बहुत ज्यादा खेलों की गतिविधि होने पर
  • शारीरिक और मानसिक थकान, तनाव
  • वीर्य का निम्न गुणवत्ता वाला होना और मात्रा में कम होना
  • ऑर्गाज़्म की उत्तेजना में कमी का होना

5. पर्याप्त विटामिन डी लें

विटामिन डी एक और ऐसा पोषक पदार्थ है जो आपके टेस्टोस्टेरोन स्तर को बढ़ा सकता है।

एक अवलोकनार्थ शोध ने दर्शाया है कि विटामिन डी की कमी से ग्रस्त लोगों में टेस्टोस्टेरोन स्तर कम होने की संभावना ज़्यादा हो सकती है।.

कम टेस्टोस्टेरोन स्तर और विटामिन डी की कमी से ग्रस्त 65 पुरुषों पर किए गए एक नियंत्रित शोध से भी इन नतीजों को बल मिला। रोज 3,000 IU विटामिन डी3 लेने से उनका टेस्टोस्टेरोन स्तर लगभग 25% बढ़ गया। (28).

यही नहीं, विटामिन डी का स्तर अच्छा होना शुक्राणु गतिशीलता के लिए अच्छा माना जाता है लेकिन इसके प्रमाण विरोधाभासी हैं।.

निष्कर्ष: विटामिन डी सप्लिमेंट लेने से विटामिन-डी की कमी से ग्रस्त पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ सकता है।

6. ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस आज़माएँ

ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस, जिसे पंक्चरवाइन के नाम से भी जाना जाता है, एक चिकित्सकीय औषधि है जिसे पुरुष उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है।

कम धातु वाले पुरुषों पर किए गए एक शोध ने दर्शाया कि दो महीने तक रोज 6 ग्राम ट्रिबुलस की जड़ का सेवन करने से खड़े होने और कामेच्छा में वृद्धि हो गई थी।.

हालांकि ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस से टेस्टोस्टेरोन स्तर नहीं बढ़ता है, शोध दर्शाते हैं कि ये टेस्टोस्टेरोन के कामेच्छा बढ़ाने के प्रभाव को बढ़ा सकती है।.

लेकिन इसके कामोद्दीपक गुणों की पुष्टि करने और दीर्घ-कालिक जोखिमों और लाभों का आकलन करने के लिए और शोधों की आवश्यकता है।

निष्कर्ष: एक शोध ने ऐसे संकेत दिए हैं कि ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस से पुरुषों में कामेच्छा और खड़ा होना बेहतर हो सकता है लेकिन वर्तमान प्रमाण निर्बल हैं।

7. सौंफ के सप्लिमेंट लें

सौंफ (Trigonella foenum-graecum) एक लोकप्रिय खाद्य पदार्थ और चिकित्सकीय औषधि है।

एक शोध में हफ्ते में चार बार वजन उठाने वाली ट्रेनिंग करने वाले 30 पुरुषों पर रोज 500 मिग्रा सौंफ सप्लिमेंट लेने के प्रभावों का विश्लेषण किया गया था।

तुलनात्मक रूप से, सप्लिमेंट लेने वाले पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन स्तर, दम-खम और वसा जलने में काफी वृद्धि देखी गई।

60 स्वस्थ पुरुषों पर किए गए एक और शोध में पाया गया कि छः हफ्ते तक रोज 600 मिग्रा Testofen नमक सौंफ के सत्त और खनिजों से बने सप्लिमेंट को लेने से कामेच्छा, सेक्स प्रदर्शन और दम-खम में वृद्धि हो गई थी।

इन निष्कर्षों की 120 स्वस्थ पुरुषों पर किए एक अन्य ज़्यादा बड़े शोध में पुष्टि हुई थी। तीन महीने तक रोज 600 मिग्रा Testofen लेने से लोगों ने बेहतर खड़े होने तथा सेक्स की आवृत्ति बढ़ना रिपोर्ट किया था।

इस सप्लिमेंट से टेस्टोस्टेरोन स्तर में भी काफी वृद्धि पाई गई।

यह ध्यान रखें कि ये सारे शोध सौंफ के सत्त लेने वाले लोगों पर किए आए थे। ऐसी संभावना कम है कि खाने और हर्बल चाय में इस्तेमाल होने वाली साबुत सौंफ से भी ऐसे ही लाभ हो सकते हैं।

निष्कर्ष: सेक्स प्रदर्शन और कामेच्छा में वृद्धि के लिए सौंफ के प्रभाव की जाँच के लिए किए गए कुछ शोधों के नतीजे सकारात्मक रहे हैं। हालांकि अधिकतर शोधों में सौंफ के बीजों के सत्त का इस्तेमाल किया गया था।

8. पर्याप्त मात्रा में ज़िंक लें

ज़िंक एक आधारभूत खनिज है जो मांसाहार जैसे, माँस, मछली, अंडों और घोंघों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

पुरुष उर्वरता के लिए ज़िंक का पर्याप्त होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

अवलोकनार्थ शोध दर्शाते हैं कि ज़िंक की मात्रा कम होने से टेस्टोस्टेरोन स्तर कम हो जाता है, वीर्य की गुणवत्ता घट जाती है और नामर्दी का जोखिम बढ़ जाता है.

ज़िंक की कमी से ग्रस्त लोगों द्वारा ज़िंक सप्लिमेंट लेने से उनका टेस्टोस्टेरोन स्तर और वीर्य मात्रा में वृद्धि होती है।.

इसके अलावा, ज़िंक सप्लिमेंट्स से अधिक व्यायाम के फलस्वरूप टेस्टोस्टेरोन स्तर में आने वाली कमी की भी रोकथाम होती है।.

इन अवलोकनों के निष्कर्षों की पुष्टि के लिए नियंत्रित परीक्षणों की आवश्यकता है।

निष्कर्ष: ज़िंक सप्लिमेंट्स लेने से ज़िंक की कमी से ग्रस्त पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन स्तर तथा उर्वरता में वृद्धि देखी गई।

9. अश्वगंधा लें

अश्वगंधा (Withania somnifera) एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे भारत में प्राचीन काल से उपयोग किया जाता रहा है।

शोध दर्शाते हैं कि अश्वगंधा टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ाकर पुरुष उर्वरता में वृद्धि कर सकती है। वीर्य की कमी से ग्रस्त पुरुषों पर किए गए एक शोध में पाया गया कि रोज 675 ग्राम अश्वगंधा की जड़ के सत्त का सेवन करने से उर्वरता में बहुत वृद्धि हो गई थी।

इससे शोध के शुरुआत के स्तर की तुलना में विशेषकर शुक्राणु संख्या में 167%, वीर्य मात्रा में 53% और शुक्राणु गतिशीलता में 57% की बढ़त देखी गई। जिन लोगों को कुछ नहीं दिया गया था उनमें न्यूनतम वृद्धि ही दर्ज की गई थी।.

इन लाभों के पीछे टेस्टोस्टेरोन का बढ़ा हुआ स्तर कुछ हद तक जिम्मेदार हो सकता है।

वजन उठाने वाली ट्रेनिंग के एक प्रोग्राम के बाद 57 जवान लड़कों पर किए गए एक शोध ने दर्शाया कि रोज 600 मिग्रा अश्वगंधा की जड़ का सत्त लेने से टेस्टोस्टेरोन स्तर, मसल और दम-खम में काफी वृद्धि हो गई थी।.

अश्वगंधा सप्लिमेंट्स से शुक्राणु संख्या, शुक्राणु गतिशीलता, एंटीऑक्सीडेंट स्टेटस और टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ जाने के अवलोकनार्थ प्रमाणों से इन निष्कर्षों की पुष्टि होती है।.

निष्कर्ष: अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक औषधि है जो टेस्टोस्टेरोन स्तर तथा पुरुष उर्वरता बढ़ा सकती है।

10. माका जड़ खाएँ

माका जड़ एक लोकप्रिय वानस्पतिक भोजन है जो मूलतः मध्य पेरू देश से है। परंपरागत रूप से इसे कामेच्छा तथा उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता रहा है।

पुरुषों पर किए गए कई शोधों ने दर्शाया है कि तीन महीने तक 1.5 – 3 ग्राम सूखी माका जड़ का सेवन करने वाले पुरुषों ने कामेच्छा और वासना में वृद्धि रिपोर्ट की।.

शोध यह भी दर्शाते हैं कि माका जड़ से हल्के इरेक्टइल डिसफंक्शन से ग्रस्त लोगों का सेक्स प्रदर्शन बढ़ सकता है। 2.4 ग्राम सूखी माका जड़ लेने वाले पुरुषों ने इरेक्टाइल फंक्शन और सेक्स स्वास्थ्य में स्वयं वृद्धि रिपोर्ट की।.

तीन महीने तक रोज 1.75 ग्राम माका जड़ पाउडर लेने से स्वस्थ पुरुषों में शुक्राणु संख्या एवं शुक्राणु गतिशीलता में वृद्धि दर्ज की गई।.

प्रतिक्रियाएँ भी इन निष्कर्षों की कुछ स्तर तक पुष्टि करती हैं लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रमाण कमजोर हैं और निश्चित दावे करने से पहले और शोध की आवश्यक्ता है।.

यह भी प्रतीत होता है कि माका जड़ हॉरमोन स्तर पर कोई प्रभाव नहीं डालती। तीन महीने तक 1.5 – 3 ग्राम माका जड़ रोज लेने से स्वस्थ, उर्वर पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन या अन्य प्रजनन संबंधी हॉरमोन्स के स्तर पर कोई प्रभाव दर्ज नहीं किया गया।.

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